
नई दिल्ली। ब्राजील की राजनीति में लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा का सफर उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। 80 साल की उम्र में चौथी बार राष्ट्रपति चुनाव जीतने की खबर के साथ वे एक बार फिर चर्चा में हैं। पहले दौर की वोटिंग में फ्लावियो बोल्सोनारो से पिछड़ने के बाद लूला ने दूसरे दौर में बाजी पलट दी। 1989 में ब्राजील में प्रत्यक्ष राष्ट्रपति चुनाव की शुरुआत के बाद यह पहला ऐसा मामला बताया जा रहा है, जब पहले दौर में दूसरे स्थान पर रहने वाला उम्मीदवार अंतिम दौर में जीतकर राष्ट्रपति बना।
फ्लावियो बोल्सोनारो ब्राजील के पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के बेटे हैं। बोल्सोनारो परिवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का करीबी माना जाता है। पहले चरण में फ्लावियो को करीब 47 प्रतिशत वोट मिले थे। इससे पहले 2022 के चुनाव में भी लूला ने जायर बोल्सोनारो को हराकर सत्ता हासिल की थी। इस बार भी दोनों राजनीतिक विचारधाराओं के बीच मुकाबला ब्राजील की राजनीति के लिए अहम माना जा रहा है।
लूला 2003 से 2010 तक लगातार दो कार्यकाल ब्राजील के राष्ट्रपति रहे। इसके बाद उन्हें पद छोड़ना पड़ा। उनके राजनीतिक जीवन में 2018 का साल बड़ा झटका लेकर आया, जब भ्रष्टाचार के मामले में उन्हें जेल जाना पड़ा। हालांकि, बाद में उनकी सजा रद्द कर दी गई और वे फिर सक्रिय राजनीति में लौटे। 2022 के चुनाव में जीत के साथ उन्होंने सत्ता में वापसी की। उनका राजनीतिक सफर संघर्ष, विवाद और वापसी की कहानी रहा है।
चुनाव से पहले हुए सर्वेक्षणों में लूला को महिलाओं और कैथोलिक मतदाताओं के बीच बढ़त दिखाई गई थी। सर्वे के मुताबिक, 49 प्रतिशत महिलाओं ने लूला का समर्थन किया, जबकि फ्लावियो के पक्ष में 40 प्रतिशत महिलाएं थीं। इसी तरह कैथोलिक मतदाताओं में लूला को 52 प्रतिशत और फ्लावियो को 42 प्रतिशत समर्थन मिलने का अनुमान था। लूला ने अपने प्रचार में ब्राजील की स्वतंत्रता और राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया। अमेरिका के दबाव के बीच देश को अपने फैसले खुद लेने चाहिए, उनका यह संदेश भी चर्चा में रहा।
28 अक्टूबर 2026