
भोपाल। मध्यप्रदेश में सड़क, रेल और हवाई परिवहन का दायरा बढ़ा है। प्रदेश में 80,775 किलोमीटर का सड़क नेटवर्क, 45 राष्ट्रीय राजमार्ग, मेट्रो सेवा और अंतरराष्ट्रीय उड़ानें हैं। इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे जैसी परियोजनाएं कनेक्टिविटी को नई दिशा दे रही हैं। लेकिन सवाल यह है कि इन सुविधाओं का लाभ प्रदेश के हर जिले और आम नागरिक तक कितना पहुंचा है? क्या ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कें, छोटे शहरों में सार्वजनिक परिवहन और दूरदराज के इलाकों में हवाई सेवाएं भी उतनी ही मजबूत हुई हैं?
मध्यप्रदेश में 45 राष्ट्रीय राजमार्गों की कुल लंबाई 9,315 किलोमीटर है, जबकि कुल सड़क नेटवर्क 80,775 किलोमीटर है। इंदौर-उज्जैन के बीच 48.1 किलोमीटर लंबा ग्रीनफील्ड कॉरिडोर बनाया जा रहा है। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे का 244.17 किलोमीटर हिस्सा प्रदेश से गुजरेगा। जबलपुर में 114 किलोमीटर लंबी आउटर रिंग रोड भी निर्माणाधीन है। इन परियोजनाओं के बीच सवाल यह है कि मुख्य मार्गों के साथ ग्रामीण सड़कों की स्थिति सुधारने, गड्ढों से राहत देने और शहरों में यातायात का दबाव कम करने के लिए कितनी प्रभावी व्यवस्था की गई है?
इंदौर मेट्रो के 16 स्टेशनों वाले कॉरिडोर पर संचालन शुरू होने के बाद 24 दिनों में 60 हजार से अधिक यात्रियों ने सफर किया। प्रदेश को 10 वंदे भारत और 14 अमृत भारत ट्रेनों की सौगात भी मिली है। लेकिन क्या आधुनिक परिवहन सुविधाओं का विस्तार बड़े शहरों से आगे भी हो रहा है? छोटे शहरों और कस्बों में नियमित बस सेवा, पर्याप्त रेल कनेक्टिविटी और किफायती सार्वजनिक परिवहन की जरूरत अब भी अहम है।
प्रदेश में आठ एयरपोर्ट, 20 से अधिक एयरस्ट्रिप और 220 हेलीपैड हैं। इंदौर से शारजाह और अबूधाबी के लिए सीधी उड़ानें उपलब्ध हैं। रीवा, दतिया और सतना में भी हवाई सेवाओं का विस्तार हुआ है। ऐसे में सवाल है कि कितने जिलों के लोगों को नियमित उड़ानों का लाभ मिल रहा है और हवाई यात्रा आम नागरिक की पहुंच में कितनी है?
राज्य सरकार के अनुसार, पीएमश्री एयर एंबुलेंस योजना के तहत दो वर्षों में 186 अति गंभीर मरीजों की जान बचाई गई। यह राहत देने वाला आंकड़ा है, लेकिन प्रदेश के दूरदराज इलाकों में समय पर चिकित्सा सहायता पहुंचाने, पात्र मरीजों को योजना की जानकारी देने और आपातकालीन सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने की चुनौती भी महत्वपूर्ण है। परिवहन विकास की असली कसौटी यही है कि आधुनिक सुविधाओं के साथ आम नागरिक का रोजमर्रा का सफर भी सुरक्षित, सस्ता और सुगम हो।
28 अक्टूबर 2026