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नकटी गांव के 85 मकानों को खाली कराने के लिए अभियान, 4000 पुलिसकर्मी, 14 बुलडोजर, 250 कोटवार और 300 सदस्यीय टीम नियुक्त

जन प्रकाशन 29 जून 2026
3 मिनट में पढ़ें
नकटी गांव के 85 मकानों को खाली कराने के लिए अभियान, 4000 पुलिसकर्मी, 14 बुलडोजर, 250 कोटवार और 300 सदस्यीय टीम नियुक्त

रायपुर। नकटी गांव में चरागाह की शासकीय जमीन पर विधायकों के मकान और आवासीय कालोनी निर्माण की तैयारी को लेकर प्रशासन ने सोमवार को गांव के करीब 85 मकानों को खाली कराने के लिए अभियान चलाया। अभियान में 4000 पुलिसकर्मी, 14 बुलडोजर, 250 कोटवार और 300 सदस्यीय टीम प्रहरी लगाए गए हैं। 200 अधिकारियों की संयुक्त टीम मौके पर तैनात है। जिले के सभी पटवारियों, राजस्व अधिकारियों की ड्यूटी भी लगाई गई है।

चिन्हित मकानों पर कार्रवाई शुरू

सुबह चार बजे से अलग-अलग टीमें गांव पहुंचनी शुरू हो गईं। प्रत्येक टीम ने चिन्हित मकानों पर कार्रवाई शुरू की। ग्रामीणों ने कार्रवाई का विरोध किया। पुलिस की घेराबंदी तोड़ने के प्रयास में दोनों पक्षों के बीच धक्कामुक्की भी हुई। इलाके में तनाव को देखते हुए गांव के आसपास बैरिकेडिंग और निगरानी भी बढ़ा दी गई है।

कार्रवाई राजस्व अभिलेखों और पूर्व में जारी नोटिस के आधार पर की जा रही

कार्रवाई को सुचारु रूप से पूरा करने प्रशासन ने गांव को अलग-अलग सेक्टर में विभाजित किया है। प्रत्येक सेक्टर में राजस्व, पुलिस और स्थानीय प्रशासन की अलग टीम तैनात रहेगी। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि तय समय पर पहुंचकर मकान खाली कराए जाएं। प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई राजस्व अभिलेखों और पूर्व में जारी नोटिस के आधार पर की जा रही है।

85 परिवारों के सामने छत का संकट पैदा हुआ

राजधानी से लगे नकटी गांव में जमीन खाली करने के लिए चलाए जा रहे अभियान के बाद तनाव की स्थिति बनी हुई है। ढाई हजार की आबादी वाले इस गांव के 85 परिवारों के सामने छत का संकट पैदा हो गया है। रविवार को गांव के सैकड़ों लोग पीपल पेड़ के नीचे शासन के फैसले के खिलाफ बैठक करते रहे। जिन परिवारों को नोटिस दिया है, वे 40 से 50 वर्षों से इस जमीन पर रह रहे हैं।

कार्यों के लिए किसी को भी बेघर करना सरकार की प्राथमिकता नहीं

ग्रामीण शनिवार को सांसद बृजमोहन अग्रवाल से मुलाकात कर चुके हैं। सांसद ने ग्रामीणों से कहा है कि प्रस्तावित कार्यों के लिए किसी को भी बेघर करना सरकार की प्राथमिकता नहीं है। उन्होंने आश्वस्त किया है कि वे मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से इस पर चर्चा कर उचित समाधान निकालने का प्रयास करेंगे।

शासन की योजना यहां 55 एकड़ में विधायक कालोनी विकसित करने की है। गत वर्ष भी ग्रामीणों को बेदखल किए जाने का मामला गर्माया था। गांव में दो महीने तक धरना चला था। उस दौरान आश्वासन मिलने के बाद आंदोलन समाप्त किया था।

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श्रेणियाँ:छत्तीसगढ़रायपुरराजनीति

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