अहंकारी रावण के अंत और पुरुषोत्तम श्रीराम की विजय का पर्व है दशहरा
जन प्रकाशन 2 अक्टूबर 2025
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जन प्रकाशन मीडिया समूह की ओर से सभी देशवासियों को विजय दशमी की हार्दिक शुभकामनाएं
"तासु तेज समान प्रभु आनन। हरषे देखि संभु चतुरानन॥
जय-जय धुनि पूरी ब्रह्मंडा। जय रघुबीर प्रबल भुजदंडा।।"
अर्थात- 'रावण का तेज प्रभु के मुख में समा गया। यह देखकर शिवजी और ब्रह्माजी हर्षित हुए। ब्रह्माण्डभर में जय-जय की ध्वनि भर गई। प्रबल भुजदण्डों वाले श्री रघुवीर की जय हो।' रामायण की यह चौपाई वर्णन करती है रावण वध के बाद का दृश्य। रावण के आतंक से परेशान देवता, मनुष्य, पशु पक्षी सभी उसका अंत होते ही हर्षित होकर श्रीराम की जयजयकार करने लगता है। त्रेतायुग से लेकर आज तक रावण के वध को सभी हर्ष के साथ दशहरा के त्योहार के रूप में मनाते हैं। दशहरा का अर्थ सिर्फ लंकापति रावण के अंत का विजयोल्लास मनाना नहीं बल्कि एक अवसर है हमारे भीतर बसे अहंकार, क्रोध, ईर्ष्या रूपी दानवों का वध करने का।
धर्म से बढ़ा कोई नहीं
रावण वध के साथ ही मां दुर्गा ने नौ दिन के संघर्ष के बाद दसवें दिन महिषासुर का वध किया। यह महिषासुर भी कोई और नहीं बल्कि मनुष्य के भ