नवरात्रि की अष्टमी तिथि को मां महागौरी की पूजा की जाती है। गौरवर्णी होने से मां को महागौरी कहा जाता है। इसके साथ ही उन्हें श्वेतांबर धरा नाम से भी जाना जाता है। मां के रंग की उपमा शंख, चंद्र देव और कनेर के फूलों से की जाती है। मां का वाहन बैल है इसलिए उन्हें वृषारूढ़ा भी कहा जाता है।
भक्तों को मिलता है समृद्धि का आशीर्वाद
मां का दाहिना हाथ अभय मुद्रा में अपने भक्तों के कष्ट हरने के लिए और उन्हें आशीर्वाद देने के लिए रहता है। उनके दूसरे हाथ में त्रिशूल है जिससे वह दुष्टों का संहार करती है। उनके ऊपर के बाएं हाथ में डमरू और नीचे वाले हाथ में शांत मुद्रा बनी हुई है। मां की आराधना करने वाले भक्तों को अन्न धन और सुख समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।
ऐसे देवी मां बनी महागौरी
पौराणिक कथा के अनुसार देवी ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कई वर्षों तक कठिन तपस्या की थी। इस तप के कारण मां की त्वचा पर धूल जम गई और वह कई दिखाई देने लगी। मां के कठिन तपस्या से प्रसन्न होकर महादेव ने उन्हें दर्शन दिए और विवाह का वचन दिया इसके बाद माता ने जल से अपने शरीर पर लगी मिट्टी और धूल को साफ क