मां कुष्मांडा की मुस्कान से हुई संसार की रचना, आज है मां कुष्मांडा की पूजा का दिन
जन प्रकाशन 25 सितंबर 2025
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नवरात्रि की चतुर्थी तिथि को मां कुष्मांडा की पूजा की जाती है। माना जाता है कि मां की पूजा करने से रोक, शोक व कष्ट दूर होते हैं और धन यश और आय में वृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। मां कुष्मांडा दुर्गा माता का चौथा स्वरूप है। उनकी उपासना से घर में सुख-समृद्धि व उन्नति होती है। शास्त्रों के अनुसार मां सूर्य मंडल के भीतर के लोक में वास करती है और मां के शरीर की कांति भी सूर्य के समान है। मां में विद्यमान तेज से ही सभी दिशाएं प्रकाशित होती है।
मां कुष्मांडा करती हैं अपने भक्तों के जीवन से दुख और कष्ट का निवारण
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कुष्मांडा की सच्चे मन से पूजा करने पर जीवन से दुख और कष्ट दूर हो जाते हैं और रुके हुए कार्य भी शीघ्र पूरे हो जाते हैं। मां कुष्मांडा का नाम इसलिए पड़ा क्योंकि उनकी मुस्कान (कुशमंड) से ही सम्पूर्ण ब्रह्मांड की रचना हुई थी। नवरात्रि के इस दिन व्रत रखने वाले भक्त विशेष रूप से मां कुष्मांडा की कथा का पाठ करते हैं। यह माना जाता है कि कथा का पाठ न करने पर पूजा का पूर्ण फल नहीं मिलता। इसलिए चौथे दिन की पूजा में मंत्र, कथा श्रवण और दीप जलाने का विशेष महत्