
नई दिल्ली। देश में बाल मजदूरी पर रोक लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के सचिव को बाल श्रम से जुड़े कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन और निगरानी के लिए विशेष सेल गठित करने का निर्देश दिया है। साथ ही केंद्र सरकार से कहा है कि वह सभी राज्यों के मुख्य सचिवों के माध्यम से संबंधित प्रवर्तन एजेंसियों को कानून का सख्ती से पालन कराने के निर्देश जारी करे।
जस्टिस एसवीएन भट्टी और जस्टिस एनवी अंजारिया की खंडपीठ ने बाल एवं किशोर श्रम (निषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 के प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिका का निपटारा करते हुए ये निर्देश दिए। याचिका में खासतौर पर अधिनियम की धारा 3 को चुनौती दी गई थी। इस प्रावधान के तहत पहले बच्चों के रोजगार पर कुछ चुनिंदा खतरनाक व्यवसायों में ही प्रतिबंध था। हालांकि, 2016 में कानून में संशोधन कर 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को सभी व्यवसायों और प्रक्रियाओं में काम पर लगाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया। इसमें कुछ सीमित अपवाद भी शामिल हैं। कानून के मुताबिक बच्चे स्कूल के बाद या छुट्टियों में गैर-खतरनाक पारिवारिक उद्यमों में मदद कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए निर्धारित शर्तों का पालन जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कानून और 2016 के संशोधनों का प्रभावी व सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के लिए केंद्र और राज्य स्तर पर जरूरी कदम उठाए जाएं।
27 अक्टूबर 2026