
दशहरे की शुभकामनाएं केवल एक-दूसरे को खुशियां बांटने का अवसर नहीं, बल्कि अपने भीतर की अच्छाइयों को जगाने का भी दिन हैं। यह पर्व हमें याद दिलाता है कि जीवन में चाहे कितनी भी मुश्किलें आएं, सत्य और अच्छाई का रास्ता कभी नहीं छोड़ना चाहिए। रावण के दस सिर बुराई के प्रतीक माने जाते हैं, लेकिन आज हमारे भीतर भी अहंकार, क्रोध, लालच, ईर्ष्या और स्वार्थ जैसी अनेक बुराइयां मौजूद हैं। ऐसे में दशहरे का असली अर्थ तभी पूरा होगा, जब हम रावण के पुतले के साथ अपने भीतर की बुराइयों को भी जलाने का संकल्प लें।
भगवान श्रीराम का जीवन हमें सिखाता है कि महानता केवल ताकत, पद या प्रतिष्ठा से नहीं, बल्कि हमारे व्यवहार और विचारों से तय होती है। उन्होंने परिस्थितियां कैसी भी हों, अपने कर्तव्य और मर्यादा का साथ नहीं छोड़ा। पिता के वचन का सम्मान करने के लिए राजमहल छोड़ना हो या कठिन समय में भी धैर्य बनाए रखना, श्रीराम ने हर कदम पर आदर्श प्रस्तुत किए। आज जब छोटी-छोटी बातों पर रिश्ते टूट जाते हैं और स्वार्थ के कारण अपने भी पराए हो जाते हैं, तब श्रीराम का जीवन हमें रिश्तों की अहमियत, जिम्मेदारी और त्याग का अर्थ समझाता है।
आज की दुनिया में हर व्यक्ति किसी न किसी दौड़ में शामिल है। किसी को धन चाहिए, किसी को सफलता, तो किसी को समाज में पहचान। इस दौड़ में हम कई बार यह भूल जाते हैं कि सबसे बड़ी जीत अपने मन की कमजोरियों पर विजय पाना है। क्रोध आने पर शांत रहना, अवसर मिलने पर भी गलत रास्ता न चुनना, किसी कमजोर का सहारा बनना और गलती होने पर उसे स्वीकार करना भी विजय के ही रूप हैं। श्रीराम का आदर्श हमें यही सिखाता है कि सच्चा विजेता वह नहीं, जो दूसरों को पराजित कर दे, बल्कि वह है, जो अपने आचरण से दूसरों के जीवन में अच्छाई ला सके।
अगर श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में उतारना है, तो इसकी शुरुआत अपने घर से करनी होगी। माता-पिता के प्रति सम्मान, भाई-बहनों के बीच प्रेम, पति-पत्नी के रिश्ते में विश्वास और बच्चों के प्रति संवेदनशीलता ही वह आधार हैं, जिन पर एक सुंदर परिवार बनता है। घर में राम का अर्थ केवल पूजा करना नहीं, बल्कि ऐसा व्यवहार करना है, जिसमें किसी का अपमान न हो, किसी की भावनाओं को चोट न पहुंचे और जरूरत पड़ने पर एक-दूसरे का हाथ थामा जाए। जब हमारे शब्दों में मिठास, व्यवहार में विनम्रता और फैसलों में न्याय होगा, तभी राम के आदर्श हमारे जीवन में साकार होंगे।
आइए, इस विजयादशमी पर हम संकल्प लें कि नफरत के बदले प्रेम, अहंकार के बदले विनम्रता और स्वार्थ के बदले सेवा को चुनेंगे। हम किसी के चेहरे पर मुस्कान लाने, किसी दुखी का सहारा बनने और सच के साथ खड़े रहने की कोशिश करेंगे। क्योंकि भगवान श्रीराम का संदेश किसी एक युग या किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, वह हर उस इंसान के लिए है, जो अपने जीवन को बेहतर बनाना चाहता है। यह दशहरा आपके जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और नई उम्मीदें लेकर आए। आपके भीतर की अच्छाई मजबूत हो और आपके हर कदम पर सत्य की जीत हो। आपको और आपके पूरे परिवार को विजयादशमी की हार्दिक शुभकामनाएं।
24 अक्टूबर 2026